ROM का पूरा नाम है READ ONLY MEMORY
1960 के दशक में रॉबर्ट देनार्ड ( robert dennard ) ने इसकी अवधारणा दी थी |
ROM भी एक प्रकार का memory है यानी के ये भी storage device का काम करता है | ये data को स्थायी रूप से स्टोर करता है | वही यदि हम RAM की बात करे तो नबिजले का कनेक्शन टूट जाने पर DATA ,RAM से उड़ जाता है ROM का उपयोग फर्मवेयर और सॉफ्टवयेर को store करने में किया जाता है जो computer को चलने में मदत करतें है |

अब कुछ विशेषताएं देख लेते है
ROM की विशेषताएं
स्थायी: light चले जाने पर भी ROM , DATA को बचा कर रखता है delete नहे होने देता बचा कर रखता है | computer software ,files photo, pdf जैसे जरूरी चीजे इसे में store होती है
केवल पढ़ने के लिए : ROM में जो DATA जमा रहता है उसे हम केवल पढ़ सकतें है उसमे किसे प्रकार का सुधर या बदलाव नही सकते है |
पूर्व- क्रमादेशित : निर्माण प्रक्रिया के दौरान पूर्व-क्रमादेशित सामग्री के साथ ROM को बनाया जाता है एक बार क्रमादेशित होने के बाद विशेष उपकरण या साधन के साथ ही DATA को मिटाया या बदला जा सकता है |
बूटस्ट्रैपिंग : ROM का सबसे पहला प्रारंभिक निर्देश (बूट कोड )होता है जो hardware को शुरू होने और operating system को load करने के लिए boot up प्रक्रिया के दौरान CPU द्वारा आदेशित किया जाता है |
ROM कितने प्रकार के होते है
ROM 4 प्रकार के होते है
1 . P-ROM
2 . M-ROM
3 . EP-ROM
4 . EEP-ROM
अब हम इन सभी को थोड़ा विस्तार से जानेंगे की ये होते क्या है
1 . P-ROM क्या होता है ?
1956 में वेन त्सिंग चाउ( WEN TSING CHOW ) ने इसे बनाया था
इसका पूरा नाम है PROGRAMABLE READ ONLY MEMORY
user को P-ROM प्रोग्राम नाम का एक विशेष उपकरण का उपयोग करके निर्माण के बाद ROM chip में DATA को program करने के अनुमति देता है
एक बार क्रमादेशित हो जाने के बाद DATA स्थायी हो जाता है और इसे बदला नही जा सकता है |
उस जगह पर इसका प्रयोग किया जाता है जहाँ फर्मवेयर या सॉफ्टवेयर अनुकूलित करने के आवश्यकता होती है लेकिन अद्यतन की आवश्यकता नही होती है
P-ROM को एक हे बार program किया जा सकता है मतलब एक ही बार इसमें बदलाव किया जा सकता है

2 . M-ROM क्या होता है ?
इसका पूरा नाम है MASK READ ONLY MEMORY,
DATA को मास्किंग नाम की एक प्रकिया का प्रयोग करके निर्माण के दौरान ROM CHIP में स्थायी रूप से program किया जाता है
जो data इसमें store किया जाता है उसे मिटाया या हटाया नही जा सकता इस कारन यह फर्मवेयर और महत्वपूर्ण सिस्टम सॉफ्टवयेर को संग्रहीत करने के लिए बहुत उपयोगी है |
आमतौर पर एम्बेडेड सिस्टम और उपकरणों में उपयोग किया जाता है जहाँ फर्मवेयर को बार – बार update करने के जरुरत नहे होती है |

3 . EP-ROM क्या होता है ?
इसको डोव फ्रॉहमैन ( DOV FROHMAN ) ने 1971 में बनाया था |
इसका पूरा नाम है ERASABLE PROGRAMMABLE READ ONLY MEMORY
इसमें user पराबैगनी (U .V ) प्रकाश का उपयोग करके chip के data को कई बार मिटाया या बदला जा सकता है लेकिन इसमें भी कुछ limit होती है
एक निर्दिस्ट अवधि के लिए( u .v ) किरणों की सहायता से chip को उजागर करके संग्रहीत डाटा को मिटाया जाता है
उसके लिए उपयोगी है झा फर्मवेयर या सॉफ्टवेयर के लिए कभी -कभार बदलाव के जरूरत होती है

4 . EEP-ROM क्या होता है
इसका पूरा नाम है ELECTRICALLY ERASABLE PROGRAMMABLE READ ONLY MEMORY
इसमें हम विद्युत संकेतों का प्रयोग करके electronic रूप से chip में store data को मिटाते या उसमें कुछ बदलाव करतें हैं |
इरेज़र और प्रोग्रामिंग को इन -सर्किट किया जा सकता है जिससे यह EP-ROM के तुलना में अधिक सुविधाजनक होता है
इनका उपयोग ऐसी जगह किया जाता है जहाँ फर्मवेयर या सॉफ्टवेयर के लिए बार- बार update के जरुरत होती है जैसे की computer में BIOS chip

